इनेलो के दबाव में हुई ढींगरा जांच की रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी गई

18th April 2017 | jansandesh.in

हरियाणा सरकार ने सोमवार को जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है. मामला यह है कि पूर्व सरकार द्वारा गुरुग्राम के चार गांवों की जमीन का लाइसेंस डेवलपर को देने में कथित तौर पर बरती गई अनियमितता की जांच का काम जस्टिस ढींगरा आयोग को सौंपा गया था. बताया जा रहा है कि इस जांच के दायरे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा से जुड़ी कंपनी भी है.

हरियाणा की वर्तमान भाजपा सरकार ने यह रिपोर्ट सौंपी है. कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी. मालूम हो कि गुरुग्राम के सेक्टर 83 की कुछ जमीनों को व्यावसायिक कॉलोनी विकसित करने के लिए प्लानिंग डिपार्टमेंट द्वारा कुछ कंपनियों को लाइसेंस दिए गए थे. लाइसेंस देने में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगा था. मई 2015 में खट्टर सरकार ने इस अनियमितता की जांच के लिए ढींगरा आयोग का गठन किया गया था. बाद में जांच के दायरे को चार गांवों तक बढ़ा दिया गया था. जस्टिस एसएन ढींगरा ने गत वर्ष अगस्त महीने में जांच रिपोर्ट हरियाणा सरकार को सौंप दी थी, अब तक इसे सावर्जनिक नहीं किया गया है.

इससे पूर्व इस पूरे मामले को पिछले कई सालों से इनेलो पार्टी उठाती रही हैं. कांग्रेस शासन में उनकी मांगों की सुनवाई नहीं हुई. जबकि भाजपा सरकार पर दबाव डालने में इनेलो सफल रही. इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय सिंह चौटाला ने ढींगरा आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग की थी. इनेलो नेता ने कहा था कि आयोग की जांच के दौरान जो भी पैसा खर्च हुआ वह हरियाणा के लोगों की गाढ़े खून-पसीने की कमाई का पैसा था और सरकार द्वारा उसे रोककर रखने की बजाय सार्वजनिक किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि आयोग की रिपोर्ट सरकार की प्रापर्टी नहीं बल्कि सरकारी कागजात हैं.

हरियाणा सरकार ने सोमवार को जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है. मामला यह है कि पूर्व सरकार द्वारा गुरुग्राम के चार गांवों की जमीन का लाइसेंस डेवलपर को देने में कथित तौर पर बरती गई अनियमितता की जांच का काम जस्टिस ढींगरा आयोग को सौंपा गया था. बताया जा रहा है कि इस जांच के दायरे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा से जुड़ी कंपनी भी है.

हरियाणा की वर्तमान भाजपा सरकार ने यह रिपोर्ट सौंपी है. कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी. मालूम हो कि गुरुग्राम के सेक्टर 83 की कुछ जमीनों को व्यावसायिक कॉलोनी विकसित करने के लिए प्लानिंग डिपार्टमेंट द्वारा कुछ कंपनियों को लाइसेंस दिए गए थे. लाइसेंस देने में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगा था. मई 2015 में खट्टर सरकार ने इस अनियमितता की जांच के लिए ढींगरा आयोग का गठन किया गया था. बाद में जांच के दायरे को चार गांवों तक बढ़ा दिया गया था. जस्टिस एसएन ढींगरा ने गत वर्ष अगस्त महीने में जांच रिपोर्ट हरियाणा सरकार को सौंप दी थी, अब तक इसे सावर्जनिक नहीं किया गया है.

इससे पूर्व इस पूरे मामले को पिछले कई सालों से इनेलो पार्टी उठाती रही हैं. कांग्रेस शासन में उनकी मांगों की सुनवाई नहीं हुई. जबकि भाजपा सरकार पर दबाव डालने में इनेलो सफल रही. इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय सिंह चौटाला ने ढींगरा आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग की थी. इनेलो नेता ने कहा था कि आयोग की जांच के दौरान जो भी पैसा खर्च हुआ वह हरियाणा के लोगों की गाढ़े खून-पसीने की कमाई का पैसा था और सरकार द्वारा उसे रोककर रखने की बजाय सार्वजनिक किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि आयोग की रिपोर्ट सरकार की प्रापर्टी नहीं बल्कि सरकारी कागजात हैं.



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