गौ-रक्षा के नाम पर हत्या, बलात्कार, हिंसा कहां तक जायज है?

8th April 2017 | jansandesh.in

पुलिस और कानून के रहते गौ रक्षा दल किस तरह कानून को अपने हाथ में लेकर हत्या, मारपीट और बलात्कार आदि की तमाम घटनाओं को अंजाम दे देते हैं. लोकतंत्र के लिए यह एक खतरे की घंटी है. जिसमें एक समूह अपने फैसेल सड़क पर हथियार के बल पर करता है. आज हम इसलिए चुप है, क्योंकि हमें लगता है कि यह आंच तो मुसलमानों पर पड़ी हुई है, जबकि आग धीरे-धीरे सब कुछ जला देती है. हम बस उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब आग हमारे घर में लगी होगी और हम चिल्लाने के अलावा कुछ नहीं कर पाएंगे.

अलवर के मामले में जो भी वीडियो में दिख रहा है, उसमें साफ दिखाई दे रहा है कि गौरक्षा के नाम पर किसानों की पिटाई की गई और उसमें एख किसान की मौत हो गई. इस बीच राज्यसभा में हंगामे के बीच अलवर में गौरक्षा के नाम पर कई लोगों की पिटाई और एक शख़्स की मौत के मामले में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी को 24 घंटे के अंदर अपना बयान बदलना पड़ा. शुक्रवार को राज्यसभा में लगातार दूसरे दिन भी हंगामा हुआ. विपक्ष के नेताओं ने मांग की कि नकवी माफी मांगें...जवाब में मुख़्तार अब्बास नकवी को अपने गुरुवार के बयान पर सफाई देनी पड़ी. गुरुवार को नकवी ने दावा किया था कि अलवर में ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं जिसका ज़िक्र राज्यसभा में किया जा रहा है. लेकिन दबाव में नकवी ने शुक्रवार को माना कि हिंसा हुई है, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज़ की गई है और छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

यूपी में इससे पहले अखलाक की इसी तरह शक के आधार पर निर्मम हत्या की जा चुकी है और हरियाणा के मेवात में 25 अगस्त 2016 को एक बच्ची और महिला के कथित सामूहिक बलात्कार और एक दंपति की हत्या की. उनको यह कहा गया था कि तुम लोग गाय खाते हो इसलिए तुम्हारे साथ यह सब कर रहे हैं.

6 अगस्‍त 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, 'गौरक्षा के नाम पर कुछ लोगों ने जो अपनी दुकानें खोलकर बैठ गए हैं, मुझे इतना गुस्‍सा आता है. गउभक्‍त अलग है, गउ सेवक अलग है. मैंने देखा है कि कुछ लोग जो पूरी रात ऐंटीसोशल एक्टिविटी करते हैं, लेकिन दिन में गौरक्षक का चोला पहन लेते हैं. मैंने राज्‍य सरकारों से अनुरोध करता हूं कि ऐसे जो गौरक्षक बनते हैं उनका डोजियर तैयार करें, 70-80 प्रतिशत ऐसे निकलेंगे जो ऐसे गोरखधंधे करते हैं जो समाज स्‍वीकार नहीं करता है लेकिन अपनी उन बुराइयों से बचने के लिए गौरक्षा का चोला पहन कर निकलते हैं. और अगर सचमुच में वो गौसेवक हैं तो मैं उनसे आग्रह करता हूं कि एक काम कीजिए, सबसे ज्‍यादा गाएं कत्‍ल के कारण नहीं, प्‍लास्टिक खाने से मरती हैं, तो आप कम से कम गाय को प्‍लास्टिक खाना बंद करवा दें, लोगों को प्‍लास्टिक फेंकना बंद करा दें तो वह भी बड़ी गौसेवा होगी. इसलिए स्‍वयंसेवा औरों को प्रताड़ि‍त करने के लिए नहीं होती.' गौ रक्षा या गौ हत्या के संदर्भ में दो ढाई साल में जितनी भी बहसें हुई हैं उनमें सरकार की तरफ से सबसे बड़ा और प्रमाणिक बयान यही है कि 70-80 फीसदी गौ रक्षक फर्जी होते हैं. उम्मीद है प्रधानमंत्री अब भी अपनी इस राय पर कायम होंगे. हमें यह नहीं मालूम कि प्रधानमंत्री की इस अपील का राज्य सरकारों पर क्या असर पड़ा. कम से कम मौजूदा विवाद के संदर्भ में राजस्थान के गृह मंत्री ही बता सकते हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील पर फर्जी गौ रक्षकों या गौ रक्षा के नाम पर दुकान चलाने वालों की कोई फाइल बनाई है या नहीं. राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया जी ही बता सकते हैं कि हिन्दू चौकी क्या है. ये किस कानून से बना है. हिन्दू चौकी का दारोगा कौन है, एसपी कौन है, एसएसपी कौन है और डीजी हिन्दू चौकी कौन है. ये हम नहीं कह रहे बल्कि अलवर से बीजेपी के लोकप्रिय विधायक ज्ञानदेव आहूजा जी ने कहा है.

इस तरह की घटनाएं समाज के तानेबाने को बिगाड़ने का काम करेंगी और सामाजिक तनाव के माहौल में भारत हमेशा दंगों की आंच पर बैठा रहेगा. दंगा हिंदू-मुस्लिम नहीं देखता, उसकी कीमत सभी को चुकानी पड़ती है. अतीत से हमने आजतक कुछ नहीं सीखा, तभी हम इस तरह की घटनाओं को दोहरा रहे हैं.



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