किसानों को लागत मूल्य का 50 प्रतिशत मुनाफा दे सरकार - अभय सिंह चौटाला 

11th October 2017 | jansandesh.in

नेता विपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने सरकार से मांग की है कि आगामी गन्ना बोर्ड की मीटिंग में न केवल गन्ने के दामों को स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट की सिफारिश के अनुसार निर्धारित करे बल्कि गन्ने की खरीद की नीति को सुचारू एवं किसान हितैषी बनाने का भी निर्णय करे। अभय सिंह चौटाला ने सरकार को याद दिलाया कि इस वर्ष केंद्र सरकार द्वारा गन्ने के एफआरपी (फेयर रिम्यूनिरेटिव प्राइस) को अगेती गन्ने की फसल के 230 रुपए प्रति क्विंटल के दाम को बढ़ाकर 255 रुपए प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया है। इस प्रकार केंद्र सरकार द्वारा गन्ने के अगेती फसल की खरीद में केवलमात्र लगभग 11 प्रतिशत की बढ़ौतरी की है।
दूसरी तरफ पिछले वर्ष राज्य में अगेती फसल का स्टेट एडवाइज्ड प्राइस (एसएपी) मूल्य 320 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था और पछेती फसल का 310 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। परंतु न तो केंद्र सरकार द्वारा और न ही राज्य सरकार द्वारा देश के किसानों को दिए गए आश्वासन का पालन किया गया। चौधरी अभय सिंह चौटाला ने याद दिलाया कि भाजपा ने प्रत्येक मंच से अपने घोषणा-पत्र सहित किसानों से यह वादा किया था कि वह उन्हें स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुसार लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत का मुनाफा देने के लिए प्रतिबद्ध है। 
नेता विपक्ष ने आगे कहा कि अब सरकार को सत्ता में बने हुए तीन वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है इसलिए प्रदेश के किसान यह आशा करते हैं कि वह उनसे किए गए इस वायदे को निभाएगी और गन्ने की अगेती फसल का मूल्य 400 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित करेगी। यदि राज्य सरकार केंद्र की तरह ही इस मूल्य को 11 या उससे कुछ अधिक प्रतिशत बढ़ाकर तय करती है तब भी वह किसानों के साथ अन्याय होगा क्योंकि उससे उन्हें अपनी लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत का लाभ नहीं प्राप्त होगा। यह न केवल यह उनके साथ विश्वासघात होगा बल्कि भाजपा की किसान विरोधी मानसिकता का प्रमाण भी होगा। 
इसके अतिरिक्त नेता विपक्ष ने यह भी मांग की कि सरकार अपनी गन्ना खरीद प्रणाली में सुधार लाते हुए राज्य की सभी सहकारी मिलों की पिराई की क्षमता में बढ़ौतरी करते हुए उसे दोगुना करे ताकि राज्य में गन्ने के बढ़े हुए उत्पादन की खपत हो। इसके अतिरिक्त उन्होंने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि किसानों के गन्ने को तो बोंडेड बना दिया जाता है परंतु उनके पूरे उत्पादन की खरीद चीनी मिलों द्वारा नहीं की जाती। परिणामस्वरूप किसान को दर-दर भटककर किसी भी भाव पर अपने गन्ने को बेचना पड़ता है। इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करे कि बोंडेड क्षेत्र के सारे उत्पादन की खरीद और पिराई मिलों द्वारा की जाए।
अभय सिंह चौटाला ने यह भी मांग की कि मिलों द्वारा अपनाई जा रही ‘पड़ता’ पद्धति को तुरंत समाप्त किया जाए क्योंकि इसके द्वारा किसानों का शोषण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी मांग की कि किसानों का भुगतान मिलों द्वारा गन्ना प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर किया जाए जिससे उसकी अर्थव्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।



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