इनसो ने किया हुड्डा सरकार के घपलों का खुलासा

11th April 2017 | jansandesh.in

हरियाणा में हुड्डा सरकार के कार्यकाल में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में कथित घोटाले का आरोप लगाया गया. कथित घोटाले का आरोप लगाने वाले इंडियन नेशनल स्टूडेंट आर्गेनाईजेशन (इनसो) के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर इसका खुलासा किया. प्रदीप देशवाल ने बताया कि एम.डी.यू के लोकल ऑडिट विभाग से RTI के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक एम.डी.यू में कांग्रेस सरकार के दौरान इमारतों के निर्माण में करोड़ रुपए की धांधली हुई है. 

प्रदीप देशवाल ने बताया कि वर्ष 2008 में मदवि ने NBCC दिल्ली के साथ एक MoU तैयार किया गया जिसके तहत उन्हें विश्वविद्यालय के कुछ निर्माण कार्य करवाने प्रस्तावित थे।  इस निर्णय के लागू होने के बाद विश्वविद्यालय को अवांछनीय वितिय भार तो उठाना ही पड़ा इसके साथ ही इसकी अपनी निर्माण शाखा के अधिकारियों और कर्मचारियों को निठल्ला बना दिया। अगर सारे कार्यो पर विश्वविद्यालय द्वारा NBCC को इस तरह दी गई फीस का आंकलन किया जाए तो यह लगभग 25 करोड़ रूपये के आसपास है। यह एक दिलचस्प तथ्य है कि इस लम्बे अरसे में विश्वविद्यालय परिसर में NBCC द्वारा नियुक्त अमले टीम के सदस्यों की संख्या 5 से 6 तकनीकि अध्किारियों व कर्मचारियों से अधिक कभी भी नही रही। कांग्रेस की सरकार आने के बाद जैसे ही कुलपति का पद खाली हुआ तो तुरन्त तत्कालीन सीएम भूपेन्द्र हुड्डा के एक अत्यंत करीबी व्यक्ति को यहां उस पद पर लगा दिया गया। एक सोची समझी रणनीति के तहत उस कुलपति ने विश्वविद्यालय के उस समय के योजनाकारों के पैनल को खत्म कर दिया और एक नया पैनल बना दिया जिसमें स्वयं उस कुलपति का पुत्रा भी शामिल था। लेकिन मिलीभगत के कारण सारे ही कार्यों के लिए उस कुलपति के पुत्र को ही योजनाकार बनाया गया. उन्होंने बताया कि किसी भी कार्य से संबंधित ड्राइंग एस्टीमैट तथा DNIT को विश्वविद्यालय की सम्बन्धित शाखा में तकनीकी अधिकारियों या कर्मचारियों द्वारा चैक या जांच नहीं कराया गया इसी प्रकार किसी भी नॉन शैडूयल आईटम के रेट विश्वविद्यालय द्वारा ना ही चैक या जांच किए गए और ना ही पास किए गए। किसी भी कार्य के करने के समय वि.वि के किसी भी स्तर के अधिकारी या कर्मचारी का सुपरविजन न होने के कारण NBCC के ठेकेदारों द्वारा कामों की गुणवक्ता पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. वि.वि द्वारा IIT दिल्ली के इण्टरकॉम व् केबलों का कार्य करवाने के लिए एस्टीमेट माँगा गया था जो लगभग 2 करोड़ रुपए का था. लेकिन वि.वि की और से वही कार्य लगभग 4 करोड़ रुपए में कराया गया. इस कार्य को करने में असली आवश्यकता को दर किनार कर कैम्पस के ऐसे स्थानों पर पाईप लाईन डाली गई जहां या तो उनकी आवश्यकता ही नहीं थी या फिर जहाँ पहले से ही लाईन उपलब्ध् थी। साथ ही इस कार्य के लिए दिए गए रेट भी बाजार की कीमतों से बहुत ज्यादा है।

प्रेस वार्ता के बाद इनसो प्रतिनिधिमंडल की ओर से मदवि के कुलपति बिजेंद्र कुमार पूनीया को ज्ञापन सौंपा धांधली की जांच कराने की मांग की गई लेकिन प्रो. पूनीया ने जांच का आश्वासन देते हुए कहा कि मामले पुराने हैं और कुछ मामलों की जांच प्रदेश सरकार कर रही है। 

हरियाणा की मुख्य विपक्षी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल की स्टूडेंट विंग इनसो द्वारा हुड्डा सरकार पर करोड़ों की धांधली के कथित आरोपों के तथ्यों को प्रदेश की मनोहर सरकार कितना गम्भीरता से लेती है यह तो प्रदेश सरकार द्वारा जाँच के आदेश के बाद ही पता चलेगा.



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