मोदी सरकार के मंत्री गीते ने माना नौकरी देने का वादा-इरादा हुआ फेल

21st October 2016 | jansandesh.in

सरकारी नौकरी देने के मामले में भाजपा सरकार का पुराना रिकार्ड हमेशा से खराब रहा है, परंतु देश के युवाओं को मोदी के भाषणों से यह उम्मीद बंधी थी कि प्राइवेट नौकरियों का देश में अंबार लग जाएगा। खासकर हरियाणा जैसे राज्यों के युवाओं को मोदी पर पूर्ण विश्वास था। जो अब टूटकर पूरी तरह बिखर गया है। जिसे मोदी सरकार के मंत्री ने भी स्वीकार किया है। हरियाणा में नई कंपनियां तो आई नहीं पुरानी कंपनिया कांग्रेस-भाजपा के कुशासन से तंग आकर दूसरे राज्यों में पलायन कर रही हैं। दूसरी तरफ सरकार की नीतियां इतनी कमजोर है कि हरियाणा में नए रोजगार पैदा ही नहीं हो रहे। यही हालत रही तो हरियाणा में बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़कर विकराल रूप धारण कर लेगी। अगर देश के युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा तो अपराध के साथ-साथ आत्महत्याओं की संख्या भी बढ़ेगी। जबकि किसान आत्महत्या तो लगातार बढ़ ही रही है। इन समस्याओं का कोई समाधान सरकार के पास भी नजर नहीं आ रहा है।

 

चुनाव के समय देश के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए मोदी जी ने जो दाव खेला था। वह अब फेल होता हुआ साफ दिख रहा है। जिसकी तसदीक भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते ने की है। गीते भारत की सोलहवीं लोक सभा के सांसद तथा केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में भारी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यमिता मंत्री हैं।
इससे मेक इन इंडिया वाली मुहिम भी फ्लाप होती हुई नज़र आ रही है। इस बात को विपक्ष एवं भारतीय कॉरपोरेट कई वर्षों से कह रहा है कि भारत में युवाओं को रोजगार मिल नहीं रहा है। जिसका बड़ा कारण है नई रोजगार का उत्पन्न न होना। दूसरी तरफ बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय उद्योगों को पनपने नहीं दे रही हैं। चुनावी वादों के साथ नीति और नीयत ही इसमें बदलाव ला सकती है। तभी देश के हालात बदल सकते हैं और युवाओं को रोजगार मिल सकता है। परंतु सरकार सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर जितनी बढ़-चढ़कर बात करती है, उसके समान काम नहीं कर रही है।
मंत्री गीते का मानना है कि भारत को सबसे ज्यादा नुकसान चीन का उद्योग पहुंचा रहा है। जबकि सरकार की तरफ से इसके लिए उचित कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिसके कारण भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार नुकसान में जा रहा है। स्टार्ट-अप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी मुहिमें केवल विज्ञापनों और कागजों पर फल-फूल रही है। जबकि इन्हें ईमानदारी से लागू किया जाता तो भारतीय युवाओं के लिए रोजगार की संभावना बढ़ जाती।



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