राहुल गांधी के कारण ही कांग्रेस की लुटिया डूबी

14th March 2017 | jansandesh.in

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस के हार के सिलसिले में एक और कड़ी जोड़ दी है. पिछले पांच साल में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस 24 चुनाव हार चुकी है. दबे स्वर में ही सही अब कांग्रेस की तरफ से ही आवाज उठने लगी है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में अब वो कोई चुनाव नहीं जीत सकेंगे.

कांग्रेस की लुटिया डूबोने का सबसे बड़ा कारण राहुल गांधी को ही माना जा रहा है. राजनीति के बड़े विद्वानों का कहना है कि अगर गिरावट का यही प्रतिशत रहा तो भारत को कांग्रेस मुक्त करने में राहुल गांधी का सबसे बड़ा योगदान होगा.

राहुल गांधी अपने नेतृत्व में अपनी पार्टी के आपसी कलह तक सुलझाने में सक्ष्म नहीं है. खासकर हरियाणा में हुड्डा और तंवर के बीच के विवाद को आज तक कोई अंजाम नहीं दे पाए, जबकि हुड्डा ग्रुप ने सरेआम तंवर की पिटाई की थी.  एकमात्र पंजाब की जीत में बादल सरकार के खिलाफ जनता ने वोट डाले. वहां भी कांग्रेस की जीत को अमरिंद्र सिंह जीत बताया जा रहा है.

हरियाणा में कांग्रेसी फूट को देखते हुए कहा जा सकता है कि हरियाणा में शायद ही कभी कांग्रेस वापसी कर पाएगी?

2013 में कांग्रेस को त्रिपुरा, नगालैंड, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कारारी हार मिली. मिजोरम और मेघालय को छोड़ दिया जाए तो उसके लिए खुशखबरी महज कर्नाटक से आई हालांकि यहां भी पार्टी की जीत के लिए कांग्रेस को कम और येदुरप्पा प्रकरण के चलते हुई बीजेपी की बदनामी को ज्यादा बड़ी वजह माना गया. 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत की उम्मीद तो किसी ने नहीं की थी लेकिन वो महज 44 सीटों तक सिमट जाएगी ऐसी कल्पना भी उसके धुर विरोधियों को नहीं थी. इसी साल पार्टी ने हरियाणा और महाराष्ट्र में सत्ता गंवा दी. झारखंड, जम्मू-कश्मीर में भी उसकी करारी हार हुई. 2015 में बिहार में महागठबंधन में शामिल होकर उसने जीत का स्वाद चखा लेकिन इसी साल उसे असली झटका दिल्ली में मिला जहां उसे एक भी सीट नहीं मिली. 2016 भी कांग्रेस के लिए कोई अच्छी खबर लेकर नहीं आया. इस साल उसके हाथ से असम जैसा बड़ा राज्य चला गया. केरल में भी उसकी गठबंधन सरकार हार गई जबकि पश्चिम बंगाल में लेफ्ट के साथ चुनाव लड़ने के बावजूद उसका सूपड़ा साफ हो गया. हालांकि पुड्डुचेरी में उसकी सरकार बनी.



अन्य ख़बरें